ऐ खुशी !!

ऐ खुशी तू ज़रा नाखुश क्यों है ?

क्यों लगे थोडी कम तू,बुझी बुझी क्यों है ?

जब छोटे थे हम तो तू लगती बडी थी ।

अब हम हैं बडे,पर कहाँ छिप गई तू यहीं तो खडी थी ।

वो पहले तू आती थी बिन कुछ बताए ।

अब न जाने तू क्यों घबराये ?

चहकती है तू उस बच्चे की अठ्ठनी में ।

अब मैं ढूंढता हूँ तूझे पैसों की खनखनी में ।

तूझे पाने को सारे जतन ये करूँ मैं ।

पा लूंगा तूझे फिर से, मन में हिम्मत भरू मैं ।

मुझे लगता है,उन लंबी गाडियों में कहीं है ।

कभी सोचता हूँ इन ऊँचे बंगलो में तो नही है ?

इस कागज़ के टुकडे मे दिखती नहीं है ।

बता दे तू मुझको, तू है या नहीं है ?

ये माथे पे चिंता,आँखों में नमी क्यों है ?

क्यों हैरा है मुझसे,ये बेरूखी क्यों है ?

ऐ खुशी तू ज़रा नाखुश क्यों है ?

क्यों लगे थोडी कम तू,बुझी बुझी क्यों है ?

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